राजस्थानी बड़े मेहनती होते हैं, यह तो आपने सुना ही होगा लेकिन आज हम आपको उनसे रुबरू करवाने वाले है। राजस्थान के अलवर जिले के थानागाजी कस्बे की चनीजा की ढ़ाणी के लाल अशोक गुर्जर से जिन्होंने इंडो-नेपाल चैम्पियनशिप मे 10 किलोमीटर दौड़ मे स्वर्ण पदक जीता है।
उनसे साक्षात्कार किया है, हमारे पोस्टमैन न्यूज के पत्रकार रामकिशन गुर्जर ने……
रामकिशन – अशोक आपने पहली बार कब सोचा की मुझे एक खिलाड़ी बनना चाहिए ?
अशोक – राम किशन जी , हम तो किसान के बेटे हैं, बचपन से ही दौड़ रहे है, लेकिन बतौर खिलाड़ी हमारी कहानी शुरू कुछ ऐसे हुई। गांव से स्कूल पढाई पुरी करके 2017 में अग्रवाल पीजी कॉलेज जयपुर में अपना एडमिशन करवाने गया। मैं वहां एनसीसी लेना चाहता था लेकिन वहां के पीटीआई डॉ.एम. एल सैनी ने कहा यहां पर एनसीसी तो नहीं है, आप किसी भी गेम में भाग ले सकते हो तब से खिलाड़ी बनने की शुरुआत हुई।
रामकिशन – आपका इंटर कॉलेज से इंडो-नेपाल चैम्पियनशिप तक का सफर कैसा रहा ?
अशोक – यह सफर बहुत ही दुखदाई रहा। इस दौरान बुरे हालातों और सुविधाओं के अभाव से गुजरना पड़ा है। सबसे पहले मैं सितंबर 2017 को राजस्थान इंटर यूनिवर्सिटी गेम क्रॉस कंट्री में भाग लिया था। जिसमें 12 किलोमीटर रेस में मेरा 11वां स्थान रहा था।
रामकिशन – आपको देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर कैसा लगा ?
अशोक – देश के लिए सोना जीतकर बहुत ही अच्छा लग रहा है। अपने आप में गर्व फील कर रहा हूं। क्योंकि पहले मेरी टीशर्ट के पीछे राजस्थान लिखा हुआ था और अब इंडिया लिखा रहता है।
रामकिशन – आपकी प्रेरणा कौन है ? साथ ही नए एथलीटों को आप क्या संदेश देना चाहेगें।
अशोक – मेरी प्रेरणा का केंद्र स्वामी विवेकानंद जी हैं और मेरे माँ पिताजी हैं । साथ ही मेरी कामयाबी का श्रेय मेरे कोच साहब ओलंपियन अनिल पूनिया को देना चाहूंगा। मेरे साथी खिलाड़ी संदीप पूनिया, गजेंद्र सिंह तंवर और ओलंपियन सपना दीदी को देना चाहूंगा। जिन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है।
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