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समय-चक्र

समय-चक्र

 

समय महा बलवान है,
जोमझ जाए, वो महान है,
जो ना समझे, वो नादान है,
यही समय का ज्ञान है।

समयनिष्ठ ही कप्तान है,
समय से उसकी शान है,
छूता वहीं आसमान है,
जो समय का कद्रदान है।

मिलता उन्हें उपयुक्त सम्मान है,
जो रखते समय का मान है,
करते सामयिक बलिदान है,
तभी उनका जीवन आसान है।

समय की ये दास्तान है,
कुछ इस से भी अंजान है,
अगर करना नव निर्माण है,
ये जीवन जंग का मैदान है।

समय भी एक मेहमान है,
करना उसे भी प्रस्थान है,
जो करता उसकी पहचान है,
वो धरा पर आयुष्मान है।

ये एक ऐसा वरदान है,
जो जीत जाए उसे, वो सुल्तान है,
जो ना जीते वो हैरान है,
यही उसका निशान है।

इज्जत दो उसे, तो ही तुम्हारा उत्थान है,
वहीं भूत, वहीं भविष्य, वहीं पूर्ण वर्तमान है,
इसके विपरित कार्य हो, तो होता चुर अभिमान है,
प्रकृति है सुशोभित उसकी, विमान सा गतिमान है,
समय महा बलवान है-(2)।

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